कोलकाता: 34 साल की वाम सत्ता के पतन में नंदीग्राम आंदोलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। 2007 में इस भूमि आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिला दिया था।
हाल ही में, नंदीग्राम के शहीद परिवारों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपेक्षा पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने शिकायत की कि ममता बनर्जी ने स्मरण सभा में कभी हिस्सा नहीं लिया और प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।
इन परिवारों का कहना है कि आंदोलन के समय उनके परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया था, लेकिन राज्य सरकार ने उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस निराशा के चलते उन्होंने शुवेंदु अधिकारी का समर्थन किया है, जो नंदीग्राम विधानसभा से विधायक भी हैं।
शुवेंदु अधिकारी ने कहा कि वे शहीद परिवारों के लिए न्याय की मांग जारी रखेंगे और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने ममता सरकार पर वादा निभाने में असफल रहने का आरोप लगाया।
इन घटनाओं ने नंदीग्राम की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जबकि ममता बनर्जी और TMC ने इन आरोपों को खारिज किया है, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले चुनावों पर असर पड़ सकता है।