रवींद्रनाथ ठाकुर को अक्सर एक महान कवि और साहित्यकार के रूप में याद किया जाता है। बंगाली समाज ने उनके साहित्यिक योगदान को सामान्य रूप से शीर्ष वरीयता दी है। लेकिन ऐसा क्यों है कि उनके अन्य कला कार्य अपेक्षाकृत उपेक्षित हैं?
ठाकुर ने सिर्फ लेखन तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके कई अन्य कलात्मक कार्य भी हैं, जो कम चर्चा में आए हैं। यह समझने की जरूरत है कि वे एक अद्वितीय चित्रकार और संगीतकार भी थे।
यह कहना उचित होगा कि उनके साहित्यिक काम ने उनकी अन्य कलात्मक प्रतिभाओं पर प्रभाव डाला। जरूरी है कि उनकी कला के इन अन्य पहलुओं को भी उसी गंभीरता से सराहा जाए।
इसके पीछे कारणों की भी तलाश होनी चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका ‘कवि’ के रूप में स्थापित छवि अन्य कृतियों के ऊपर हावी हो गई?
उन्हें केवल एक कवि के रूप में देखना उनके इस विशाल कलात्मक व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। उनकी पेंटिंग्स और संगीत कार्य भी उनकी रचनात्मकता का अभिन्न हिस्सा हैं।