राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में देश की कुल 10,546 किसानों की आत्महत्याएं दर्ज हुई हैं। हालांकि समग्र रूप से भारत में इस संख्या में कमी देखी गई है, लेकिन कर्नाटक प्रदेश में यह दर खतरे की घंटी बजा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूखे, आर्थिक संकट और कृषि संबंधी समस्याएं इस वृद्धि के प्रमुख कारण हो सकते हैं। केन्द्र सरकार ने सुधार के उपायों की घोषणा की है, लेकिन कर्नाटक में समस्या बनी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक ने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संख्या में किसानों की आत्महत्याएं दर्ज की हैं। यह स्थिति न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर मुद्दा बन गई है।
नीति निर्माताओं और सरकार के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल और प्रभावशाली कदम उठाएं।